13 सितंबर 2018 - 15:33
आख़िरकार सीरिया पर रासायनिक हथियारों के प्रयोग का आरोप लग ही गया?

अभी कल ही अमरीका के वरिष्ठ अधिकारी जॉन बोल्टन ने एक बार फिर बल देकर कहा कि सीरिया द्वारा इदलिब में हर प्रकार के रासायनिक हथियारों के प्रयोग का मुक़ाबला किया जाएगा जबकि इदलिब के स्थानीय समाचारिक हल्क़ों ने जिस्रे शूग़ूर में रासायनिक हमले की कार्यवाही के ड्रामे पर अमल किए जाने की सूचना दी है और कहा कि इस ड्रामे का वीडियो बनाने के लिए बहुत से मीडियाकर्मियों को निमंत्रण दिया गया।

मीडियाकर्मियों को जाली रासायनिक हमले के कवरेज के लिए ऐसी स्थिति में निमंत्रण दिया गया कि अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन की धमकी की वास्तविकता भी समझ में आ गयी। ध्यान योग्य बात यह है कि सीरिया विशेषकर इदलिब के बारे में तेहरान शिखर सम्मेलन और इस सम्मेलन के घोषणापत्र के जारी होने के बाद जिसमें सैन्य या शांतिपूर्ण ढंग से इदलिब के मामले को हल करने पर बल दिया गया था। इधर तेहरान की बैठक समाप्त हुई और अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस ने हाथ पैर मारना शुरु कर ताकि शीघ्र ही शुरु होने वाले इस आप्रेशन को रोक सकें या कम से कम इसको विलंबित कर सकें।

अब यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि पश्चिमी देश विशेषकर अमरीका क्यों इदलिब आप्रेशन को रोकने या कम से कम इसमें देरी पैदा करने पर बल दे रहा है? इसका मुख्य कारण यह है कि सीरिया के इदलिब में आप्रेशन शुरु होने से यूरोप की ओर आतंकवादियों की एक लहर निकल पड़ेगी और पश्चिमी देशों को इसे नियंत्रित करना बहुत कठिन हो जाएगा।

वर्तमान समय में ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम को इदलिब के बारे में तुर्की के दृष्टिकोण से कुछ उम्मीद पैदा हो गयी है और वह इस बात को लेकर प्रसन्न है कि इदलिब आप्रेशन को लेकर अंकारा और मास्को के बीच गहरे मतभेद पैदा हो गये हैं। पश्चिम, मास्को और अंकारा के बीच मतभेद को हवा देकर तथा तुर्की के लिए नैटों की बाहें खोलकर फिर से तुर्की को अपना बनाना चाहता है। दूसरी ओर पश्चिमी प्राप्त हुए मौक़े से लाभ उठाते हुए उन्हें फिर से एकजुट और सशस्त्र करने की चेष्टा में हैं और यह वह चीज़ है जो पश्चिम विशेषकर अमरीका, सीरिया के सात वर्षीय युद्ध में प्राप्त नहीं कर सका।

एक अनुमान के अनुसार इस समय इदलिब में 1 लाख 20 हज़ार सशस्त्र आतंकवादी हैं जिन्हें सीरिया की सरकार और उसके घटकों की ओर से कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता जबकि कुछ सूत्रों का कहना है कि इदलिब के 70 प्रतिशत भाग पर नुस्रा फ़्रंट का जबकि बाक़ी 30 प्रतिशत भाग पर अन्य आतंकवादी गुटों का नियंत्रण है। अमरीका और उसके घटक, सीरिया में अपने हितों की रक्षा के लिए अंतिम मौक़ा तलाश कर रहे हैं।

हमें याद है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कुछ महीना पहले ही घोषणा की थी कि उनके सैनिक सीरिया के पूर्वोत्तरी क्षेत्रों से निकल जाएंगे और इसके मुक़ाबले में क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के दावे के साथ सीरिया में बाक़ी रहने पर आधारित क्षेत्र के रजवाड़ों की मांग पर जिनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात आगे थे, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कहा कि सुरक्षा गैरेंटी के ख़र्चे, इन देशों को देना होंगे।

उसी समय बहुत से टीकाकारों ने ट्रम्प की इस धमकी को अरब रजवाड़ों से अधिक पैसे एंठने के लिए एक धमकी के रूप में देखा था, अलबत्ता समय बीतने के साथ साथ बात का पता भी चलने लगा कि यदि ट्रम्प का पिछला बयान, राजनीति के किसी अनाड़ी का न होता तो पूरी तरह सही था और अमरीका ने कभी भी इस क्षेत्र से बाहर निकलने का इरादा ही नहीं किया था और इस बात की पुष्टि, रमीलान, एन ईसा और शेदादी जैसे क्षेत्रों में अमरीकी छावनियों का और अधिक मज़बूत होना है।

यहां पर यह भी बताते चलें कि सीरिया से भागने के लिए नुस्रा फ़्रंट से जुड़े आतंकियों का ख़र्चा 10 हज़ार डॉलर जबकि इदलिब से भागने वाले अन्य गुटों के आतंकियों का ख़र्चा 5 हज़ार डॉलर हो गया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इदलिब में रासायनिक हमले का ड्रामा, इदलिब में आतंकियों और उनके घटकों के मनोबल को बढ़ाने के उद्देश्य से पेश किया गया है और यहां यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इस ड्रामे को पेश करने में सबसे आगे वाइट हेलमेट्स नामक आतंकवादी गुट होगा।

इदलिब के जिस्र शूग़ूर में अब वाइट हेलमेट्स के कितने लोग बचे हैं जबकि 800 लोग इस्राईल के रास्ते फ़रार होकर दो महीना पहले जार्डन पहुंच चुके हैं?